मैं श्री सूंतोष चूंद्राकर (अध्यक्ष, नासववज़ ररटेलज़) का िन्यवाद
करता हूाँ कक उन्होंने मझु े कहाननयााँचनु ने में सहायता की| मेरे
प्रकाशक, इनववसूंसबल पजललशसफ का भी मझु ेप्रोत्साहहत करनेके
सलए शकुिया| कई कहाननयााँ अलग-अलग सूंग्रहों से इकट्ठी की
गई है, जैसे की अखबार, पत्रिकाएूं, अन्य वक्ता, और 17 सालो

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